1962 से ज़्यादा बदतर होंगे भारत और चीन सीमा विवाद के हालात


युद्व किसी भी देश के लिए फायदेमंद नहीं होता है। चाहे द्वापर में राम और रावण का युद्व हो य फिर त्रेता में कौरव और पांडव इनके परिणाम बड़े ही विनाशकारी होते हैं। अब चाहे भारत और चीन से सैन्य कार्रवाई हो य फिर भारत-पाकिस्तान सबसे में नुकसान ही नुकसान है। यदि हम मुकाबला करना चाहते हैं तो हमको अपने आपको मजबूत बनाना होगा। अपने देश से गरीबी, भुखमरी अशिक्षा से लड़ना होगा। जो सामान अन्य देशों से आयात कर रहे हैं उसको अपने देश में बनाने के लिए अधिक जोर देना होगा। जब तक दूसरे पर आश्रित रहेंगे तब तक मुकबला तो क्या सोंचना भी दूर की कौड़ी ही साबित होगा। सबसे कठिन दौर आज बड़बोलेपन का है। जिसको नुकसान पहुंचाना चाहते हैं जरूर पहुंचाए, लेकिन बड़बोलापन न दिखाएं इससे हमारी गोपनीयता भंग होती है और हमसे पहले दूसरे पक्ष को मजबूत बनने का मौका मिल जाता है।



अगर भारत सैन्य मुक़ाबला चाहता है तो चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी भारतीय फौज को साल 1962 से कहीं ज़्यादा नुक़सान पहुंचाएगी।चीन के सरकारी अख़बार (ग्लोबल टाइम्स) के इस संपादकीय को दिल्ली से छपने वाले अंग्रेज़ी अख़बार (टाइम्स ऑफ़ इंडिया) ने छापा है।(ग्लोबल टाइम्स) की ये चेतावनी भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद को लेकर हुए हालिया घटनाक्रम के बीच आई है।


(टाइम्स ऑफ़ इंडिया) के मुताबिक़ (ग्लोबल टाइम्स) ने पिछले हफ़्ते ही एक सर्वे के हवाले से ये दावा किया था कि 90 फीसदी चीनी लोग भारत के ख़िलाफ़ बदले की कार्रवाई चाहते हैं। (ग्लोबल टाइम्स) ने अपने संपादकीय लेख में लिखा है। चीन भारत से कई गुना ताक़तवर है और भारत चीन के मुक़ाबले में कहीं भी नहीं टिकता है। हमें भारत के इस भ्रम को तोड़ना होगा कि वो अमरीका जैसी ताक़तों के साथ गठजोड़ करके चीन का मुक़ाबला कर सकता है।

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